विद्यालयों में यदि छात्र- शिक्षक अनुपात मानक से कम है तो इसका कारण सिर्फ शिक्षकों की कमी को नहीं ठहराया जा सकता।

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 छात्र-शिक्षक अनुपात:* विद्यालयों में यदि छात्र- शिक्षक अनुपात मानक से कम है तो इसका कारण सिर्फ शिक्षकों की कमी को नहीं ठहराया जा सकता।

-दैनिक जागरण संपादकीय 

प्रदेश के आकांक्षात्मक विकासखंडों के विद्यालयों में यदि छात्र-शिक्षक अनुपात मानक से कम है तो इसका कारण सिर्फ शिक्षकों की कमी को नहीं ठहराया जा सकता है, इसके पीछे अन्य कारण भी हैं, जिन पर विचार किए बिना इन विद्यालयों की स्थिति में सुधार संभव नहीं। केंद्र व प्रदेश सरकार ने आकांक्षात्मक जिलों की तरह ही आकांक्षात्मक विकासखंड घोषित किए हैं। ये वे विकासखंड हैं जो पहले ही शिक्षा स्वास्थ्य सहित कई मानकों पर पिछड़े हैं और इन्हें विकास की आकांक्षा के दृष्टिगत ही विशेष प्रयासों के लिए चुना गया है। पिछले दिनों यूनिसेफ की ओर से हुए सर्वेक्षण में पाया गया कि 54 प्रतिशत विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात मानक से कम है। मानक 30 छात्रों पर एक शिक्षक का है, लेकिन यहां एक शिक्षक क्षमता से काफी अधिक छात्रों को पढ़ा रहा है। समग्रता में देखें तो परिषदीय विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात में पिछले वर्षों में सुधार आया है। अनुपात इतना भी गड़बड़ नहीं कि जिन आकांक्षात्मक विकासखंडों पर विशेष ध्यान देकर स्थिति सुधारनी है, वहां के आधे से अधिक विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती ही न हो। 

कमी का कारण यह है कि ये विद्यालय ऐसे दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित हैं कि शिक्षक वहां जाना नहीं चाहते और येन केन प्रकारेण अपना स्थानांतरण उन विद्यालयों में करा लेते हैं जहां पहुंचना या रहना आसान हो। अभी डिजिटल उपस्थति दर्ज कराने से अध्यापकों ने छूट इसी तर्क के आधार पर मांगी थी कि उन्हें दूरदराज जाना होता है इसलिए थोड़ी-बहुत देरी स्वाभाविक है। उन्हें यह छूट दे भी दी गई है। अब यह शिक्षाधिकारियों के विचार और शिक्षकों के नैतिकता बोध पर निर्भर है कि वह ऐसे स्थानों पर तैनाती के प्रति उपेक्षा का भाव न दिखाएं। जहां शिक्षकों की तैनाती अनुपात से अधिक है, वहां के शिक्षकों को आकांक्षात्मक विकासखंडों के ऐसे विद्यालयों में भेजा जाना चाहिए जहां उनकी वास्तविक आवश्यकता है। शिक्षा की स्थिति तभी सुधरेगी।

विद्यालयों में यदि छात्र- शिक्षक अनुपात मानक से कम है तो इसका कारण सिर्फ शिक्षकों की कमी को नहीं ठहराया जा सकता।

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