प्रयागराज : नई शिक्षा नीति में मानक है कि प्राथमिक विद्यालय में 150 से कम और उच्च प्राथमिक में 100 से कम छात्र संख्या होने पर प्रधानाध्यापक नहीं होंगे। ऐसे विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षक प्रभारी प्रधानाध्यापक होंगे। इस नियम के विपरीत तय मानक से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में नियुक्त प्रधानाध्यापक की गणना समायोजन प्रक्रिया में किए जाने से वह शिक्षक सरप्लस की सूची में आ रहे हैं, जो विद्यालय में सबसे जूनियर हैं। चूंकि समायोजन कनिष्ठता के क्रम में किया जाना है, जूनियर शिक्षक परेशानी में हैं। उत्तर
प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने मांग की है ऐसे प्रधानाध्यापकों की गणना पद निर्धारिण में न की जाए।
यह स्थिति तब आई, जब विद्यालयों में नामांकन घट गए। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय हैं, जिनमें पहले क्रमशः 100 और 150 नामांकन के मानक से ज्यादा
संख्या थी, तब वहां प्रधानाध्यापक नियुक्त किए गए थे।
अब वहां विद्यार्थियों की संख्या मानक से कम हो गई। इस स्थिति में उन विद्यालयों ने नियुक्त प्रधानाध्यापकों की भी गणना कर छात्र संख्या के अनुपात में सरप्लस शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है। इससे वे शिक्षक परेशान हैं, जिनकी नियुक्ति विद्यालय में सबसे अंत में हुई है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की है कि इन विद्यालयों के सहायक अध्यापकों की ही गणना कर पद निर्धारण किया जाए, जिससे कनिष्ठ शिक्षकों के साथ न्याय हो सके।
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