राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश भर के 10 लाख से अधिक शिक्षक सोमवार को अपनी एकता की ताकत दिखाएंगे। उत्तर प्रदेश समेत देश के 22 राज्यों एवं तीन केंद्र शासित प्रदेश के ये शिक्षक टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
इस आन्दोलन में यूपी के शिक्षकों की सबसे अधिक भागीदारी रहेगी। इसके लिए शनिवार रात से ही अलग-अलग जिलों से सैकड़ों शिक्षकों का दल ट्रेन-बस व अन्य निजी वाहनों से रवाना हो चुका है। दिल्ली के निकटवर्ती जिलों से रविवार रात या सोमवार को तड़के दिल्ली रवाना होंगे।
सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी को अनिवार्य किए जाने के विरोध में आंदोलित शिक्षकों की मांग है कि संसद के शीतकालीन सत्र में आरटीई लागू होने से पूर्व के नियुक्त अध्यापकों को टीईटी से छूट दिए जाने का अध्यादेश पारित किया जाए। शिक्षकों की यह भी मांग है कि 23 अगस्त 2010 के एनसीटीई आदेश का पालन सुनिश्चित कराएं क्योंकि खेल शुरू होने के बाद उसके नियम नहीं बदले जाते, इसलिए जो शिक्षक शासन के नियमावली को पूरा करते हुए शिक्षक पद पर नौकरी कर रहे हैं, उनके ऊपर अब नया कानून नहीं थोपा जा सकता। शिक्षा अधिकार कानून में 2017 में किए संशोधन में से 2012 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को बाहर रखा जाए और 23 अगस्त 2010 के आपने आदेश का एनसीटीई पालन कराएं, जिससे शिक्षकों की समस्याओं का समाधान हो सके। वैसे भी जो शिक्षक 55 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं, उन शिक्षकों के सामने बड़ी दुविधा है कि वे बच्चों को पढ़ाएं या स्वयं टीईटी की तैयारी करें।
यूपी से शिरकत करने वाले शिक्षक संगठन
● यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा)
● प्राथमिक शिक्षक संघ विनय तिवारी गुट
● जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ त्यागी गुट
● विशिष्ट बीटीसी शिक्षक एसोसिएशन
● बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन
● अनुसूचित जाति जनजाति शिक्षक एसोसिएशन
यूपी के 1.86 लाख शिक्षक हैं प्रभावित
टीईटी कानून से यूपी के एक लाख 86 हजार के करीब शिक्षक प्रभावित हो रहे है। इस आंदोलन में देश के विभन्न राज्यों से 100से अधिक शिक्षक संगठन प्रतिभाग करेंगे, वही यूपी से मोर्चे में शामिल आधा दर्जन शिक्षक संगठन धरने में शामिल होंगे।
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