एआरपी पद से शिक्षकों का मोहभंग
झाँसी : बेसिक शिक्षकों के
आकर्षण का पद अकैडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) से शिक्षकों का मोह भंग हो गया है। विभाग को खोजने पर भी आवेदक नहीं मिल रहे हैं। तीसरे चक्र की भर्ती में दूसरी बार विज्ञापन जारी कर आवेदन माँगे गए है, जिसमें रिक्त पदों के बराबर भी आवेदन नहीं आने से विभाग के माथे पर बल पड़ गए है।
उत्तर प्रदेश राज्य परियोजना लखनऊ द्वारा परिषदीय शिक्षकों को शैक्षिक सपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ब्लॉक संसाधन केन्द्र (बीआरसी) पर हिन्दी, सामाजिक, गणित विज्ञान एवं अंग्रेजी विषय से स्नातक एवं 5 वर्ष की सेवाधारी शिक्षकों के लिए अकैडमिक रिसोर्स पर्सन के 5-5 पद अस्थाई रूप से सृजित किए गए हैं। इन पदों पर काम करने के लिए काफी मात्रा में शिक्षक लालायित रहते हैं। जनपद में 45 पद सृजित किए गए हैं, जिनमें से 31 पदों पर एआरपी काम कर रहे हैं, शेष 14 पदों की भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। एआरपी चयन का पहला विज्ञापन दिसम्बर 2024 में जारी किया गया था। बड़ी मुश्किल से लगभग दो दर्जन एआरपी का ही चयन हो पाया था। शेष पदों के
लिए अप्रैल माह में पुनः विज्ञापन जारी किया गया। इसमें भी पूरे पद नहीं भरे जा सके। अब फिर से तीसरे चक्र का विज्ञापन जारी किया गया है। सामाजिक अध्ययन के 4, अंग्रेजी विषय-4, हिन्दी- 3, गणित – 2 और विज्ञान विषय के 1 पद के लिए 14 रिक्त पदों के सापेक्ष मोठ ब्लॉक से 4, बामौर से 3 और गुरसराय से 2 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। 14 पदों के सापेक्ष 9 आवेदन प्राप्त होने से विभाग को एक बार पर पुनः विज्ञापन जारी कर 30 नवम्बर तक आवेदन आमन्त्रित करना पड़े।
जानकारों का कहना है कि इस पद पर कार्य करने के इच्छुक सैकड़ों शिक्षकों का शैक्षिक कार्यों से इतर अधिक काम कराने और शासनादेश में वर्णित कार्यों के अलावा अन्य काम लेने से शिक्षकों का इस पद से मोह भंग हो गया है। जनपद में कोई भी प्रतियोगी परीक्षा हो या मोबाइल फोन पर शिक्षकों से कोई काम कराना हो, सारे कार्य की जिम्मेदारी एआरपी पर ही. डाल दी जा रही है। वॉट्सएप ग्रुप में हर काम को जल्दी न करने पर प्रतिकूल प्रविष्टि देने की चेतावनी दी जा रही है। प्रतियोगी परीक्षा के समय स्थापित हेल्प डेस्क पर रात्रि 12 बजे तक इनसे ड्यूटी कराई जाती है और अगले दिन इन्हें विद्यालय में जाकर सपोर्टिंग सुपरविजन भी करना होता है। ज्ञात हुआ है कि इस पद पर कार्यरत एआरपी भी सामूहिक इस्तीफा देने का मन बना रहे हैं। इसी कारण शिक्षकों ने आवेदन करने से दूरी बना ली है।
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