महर्षि दयानंद विवि की घटना पर केंद्र, हरियाणा सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की उस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई जिसमें सफाई कर्मियों को मासिक धर्म का सबूत देने को कहा था। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि इस तरह का सबूत मांगना लोगों की मानसिकता को दर्शाता है। साथ ही केंद्र, हरियाणा सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ शुक्रवार को एमडीयू मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय में महिला सफाई कर्मचारियों से अपने निजी अंगों की तस्वीर भेजकर यह साबित करने को कहा गया था कि उन्हें मासिक धर्म हो रहा है। जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान कहा, इससे लोगों की मानसिकता का पता चलता है। कर्नाटक में मासिक धर्म की छुट्टी दी जा रही है। यह पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि क्या वे छुट्टी देने के लिए सबूत मांगेंगे। उन्होंने कहा, अगर सफाई कर्मियों की गैरमौजूदगी की वजह से कोई भारी काम नहीं हो पा रहा था तो किसी और को लगाया जा सकता था। हमें उम्मीद है कि इस अर्जी में कुछ बेहतर नतीजा निकलेगा। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यश्र और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि यह एक बड़ा आपराधिक कृत्य है और इस मामले पर ध्यान देने की जरूरत है। कोर्ट में पेश हरियाणा सरकार के वकील ने बताया कि जांच शुरू कर दी गई है और घटना के लिए जिम्मेदार दो लोगों तथा प्रशासनिक प्रमुख सहायक रजिस्ट्रार के खिलाफ कार्रवाई की गई है। याचिका पर अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।
नौकरी से निकालने की दी थी धमकी… विश्वविद्यालय अधिकारियों को दी शिकायत में तीन महिला सफाई कर्मचारियों ने माहवारी के सबूत मांगे जाने का आरोप लगाया था। यूनिवर्सिटी में 11 साल से काम कर रही सफाई कर्मचारी ने आरोप लगाया था, हमने उनसे कहा कि हम जल्दी-जल्दी काम नहीं कर सकते क्योंकि मासिक धर्म की वजह से हमारी तबीयत ठीक नहीं है। जब हमने तस्वीरें देने से मना किया तो हमारे साथ बुरा बर्ताव किया गया और नौकरी से निकालने की धमकी दी गई.
सम्मान और निजता का उल्लंघन न होना सुनिश्चित किया जाए
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपनी याचिका में केंद्र और हरियाणा को कथित घटना की विस्तृत जांच करने का निर्देश देने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाने कि माहवारी के दौरान महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य, सम्मान, शारीरिक आजादी और निजता के अधिकार का कोई उल्लंघन न हो।
पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ दर्ज किया था मामला… पुलिस के मुताबिक, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से जुड़े तीन लोगों पर 31 अक्तूबर को यौन प्रताड़ना का का मामला दर्ज किया गया था, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर महिला सफाई कर्मचारियों से निजी अंगों की तस्वीरों के जरिये माहवारी होना साबित करने की आपत्तिजनक मांग की थी। कथित घटना 26 अक्तूबर को हुई हरियाणा के राज्यपाल के कैंपस में आने से कुछ घंटे पहले हुई थी। विश्वविद्यालय ने एक बयान जारी करके बताया था कि उसने दो सुपरवाइजर को सस्पेंड कर दिया है और घटना की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं
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