नई दिल्ली। छोटे कर्ज पर बैंकों द्वारा ज्यादा ब्याज वसूली को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने सख्त रुख अपनाया है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंकों को यह बताना होगा कि वह किस आधार पर ब्याज दर तय कर रहे हैं। बैंक को माइक्रो फाइनेंस ऋण के लिए बोर्ड मंजूर नीति बनानी होगी, जिसमें ब्याज दर तय करने का तरीका लिखा होगा।
हाल में केंद्रीय बैंक ने दिशा निर्देश-2025 जारी किए, जिसमें प्रावधान किया गया है कि बैंक माइक्रोफाइनेंस की ब्याज दर कैसे तय करते हैं, उसका पूरा मॉडल सार्वजनिक करना होगा। बताना होगा कि ब्याज दर निर्धारित करते वक्त फंड की लागत, जोखिम प्रीमियम, बैंक का मुनाफा और अन्य वैध खर्च किस तरह रखे गए हैं। माइक्रो फाइनेंस लोन पर लगने वाले सभी अतिरिक्त चार्ज, फीस, प्रोसेसिंग शुल्क की एक सीमा तय की जाए। बैंक ग्राहकों से मनमाने तरीके से अनुचित या अत्यधिक शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। केंद्रीय बैंक इन शुल्कों पर नियमित निगरानी रखेगा। बैंकों पर आरोप हैं कि छोटे ऋण पर भारी ब्याज वसूलते हैं। मनमानी ब्याज दर लगाते हैं और फिर उस पर जुर्माना भी लगाते चल जाते हैं, जिसके चलते उधारकर्ता के लिए ऋण चुकाना मुश्किल हो जाता है।
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