सीतापुर। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय के मान्यता पटल के लिपिक सुभाष वर्मा का बताया जा रहा है। इसमें लिपिक से किसी प्राइवेट विद्यालय की मान्यता को लेकर बातचीत हो रही है।
वीडियो में रुपये लेकर मान्यता देने की बात कही जा रही है। मान्यता में किसका कितना हिस्सा है, इसका भी उल्लेख लिपिक कर रहा है। लिपिक ने डीआईओएस, एसडीएम, जीआइसी प्राचार्य व अभियंता का नाम लिया है। डीआईओएस को एक लाख व एसडीएम को पचास हजार रुपये दिए जाने की बात भी लिपिक कह रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक ने लिपिक को निलंबित कर दिया है। हालांकि, गहनता से जांच से होने पर डीआईओएस कार्यालय में भ्रष्टाचार की परतें खुलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
वायरल वीडियो में यह हुई बातचीत
प्रश्न: प्राइवेट स्कूल की मान्यता करानी है, सिधौली-मिश्रिख मार्ग पर पांच किलोमीटर अंदर है। कितना खर्च आएगा ?
लिपिक : यहां का खर्चा ढाई लाख रुपये आएगा।
प्रश्न : इसमें कौन-कौन लेता है?
लिपिक : डीआईओएस, एसडीएम (संबंधित तहसील), अभियंता व जीआइसी के प्राचार्य।
प्रश्न : आप ही मामले को डील करेंगे ?
लिपिक : हां, सब हो जाएगा। चार अधिकारियों की कमेटी है।
प्रश्न : डीआईओएस का क्या रहता है ?
लिपिक : सब कुछ उसी में ही है।
प्रश्न : यहां होने के बाद ?
लिपिक : फाइल इलाहाबाद जाएगी। वहां भी डेढ़ लाख रुपये लगेगा। फिर शासन को फाइल जाएगी वहां एक लाख लगेगा।
प्रश्न : इसका मतलब पांच लाख रुपये लग जाएगा?
लिपिक : हां, ऐसा ही होगा। यहां वाला सब हम करा देंगे। इलाहाबाद के लिए नंबर दे देंगे।
प्रश्न : स्कूल की जांच के लिए कौन-कौन आता है ?
लिपिक : डीआईओएस व जीआइसी प्राचार्य जाते हैं। सब मैनेज हो जाता है।
प्रश्न : पीडब्ल्यूडी से कोई जाता है?
लिपिक : जाते नहीं.. सब मैनेज हो जाता है।
प्रश्न : एसडीएम जाते हैं ?
लिपिक : वो भी नहीं जाते..सब उसी में मैनेज है, जब ले रहे हैं तो जांच क्या करेंगे।
प्रश्न : डीआईओएस व एसडीएम कितना लेते हैं?
उत्तर : डीआईओएस एक लाख, एसडीएम 50 हजार रुपये।
मान्यता की प्रक्रिया के लिए किसी प्रकार का लेनदेन नहीं किया जाता है। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रदीप कुमार ने लिपिक सुभाष वर्मा को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक लखनऊ श्याम किशोर तिवारी को सौंपी गई है।
-राजेंद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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