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ऑनलाइन उपस्थिति- एक अभिशाप..!!*

              ▪️प्रदेश के समस्त शिक्षक साथियों आप सभी को सादर नमस्कार। जैसा कि आप सभी अवगत हो गए होंगे कि शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति के संदर्भ में गठित समिति ने अपनी संस्तुति दे दी है। इस समिति के निर्णय के अनुसार समस्त शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य और प्रत्येक स्थिति में अनिवार्य है। इस पर आगे चर्चा करते हैं।

           ▪️सर्वप्रथम आप सभी इस बात के लिए कमर कस लें कि हम किसी भी दशा में ऑनलाइन उपस्थिति नहीं देंगे। हो सकता है, हमें डराया जाए, हमें धमकाया जाए,यहाँ तक यह भी हो सकता है कि हमें निलंबन, वेतन अवरोध आदि का भी सामना करना पड़े किन्तु हमें अपने दृढ़ संकल्प पर स्थिर रहना है।हम पाँच लाख शिक्षकों के हितों का फैसला दस लोग कर देंगे, हम शिक्षकों को कदापि आशा नहीं है।

     ▪️ये सरकार के अधिकारी कितने बड़े न्यायवाद के समर्थक हो गए हैं ज़रा हमको बताएं तो…. प्रभारी प्रधानाध्यापकों के हेड मास्टर के समान वेतन देने का आदेश कितनी बार न्यायापालिका से आ चुका है.. कितने शिक्षकों को हेड मास्टर का वेतन दिया गया..?

      ▪️ शिक्षकों को बी एल ओ या शिक्षण कार्य के अतिरिक्त कहीं अन्य स्थान पर न योजित करने का आदेश कितनी बार आ चुका है…? कितना अनुपालन हुआ तनिक बताएं तो..!! शासन के अधिकारियों आपसे आग्रह है कि बंद कीजिये ये ढोंग, हम शिक्षक हैं, हम सभी समझ सकते हैं।

            ▪️महज महानिदेशक, निदेशक, सचिव और कुछ विशेष सुविधा प्राप्त शिक्षक संघ के नेता हमारे हितों के विषय में कितना चिंतन करते हैं। हम अवगत हैं।यदि आपको नहीं विश्वास है तो करके देख लीजिये, पिछली बार भी आप पराजित हुए थे, इस बार भी आपको पराजय ही देखना पड़ेगा। हम पाँच लाख शिक्षक एकजुट हैं, कुछ विशेष सुविधा प्राप्त शिक्षकों को छोड़कर। 

               ▪️मैं अत्यंत दृढ़ता से कह सकता हूँ, यह आंदोलन पुनः पूर्व के भांति स्वचालित होगा, जिसका न कोई नेता होगा और न ही आंदोलन के कोई विशेष अगुवा। हम दो दो हाथ करने के लिए तैयार हैं। यह पूर्णतया अहिंसक, शांत किन्तु अस्वीकृति का सर्वोत्तम दृष्टांत होगा। 

          ▪️और तथाकथित शिक्षक संघों के संप्रभु नेता जी लोग..!! आप भी सनद रखिये, आपका अस्तित्व हमसे है न कि हमारा अस्तित्व आपसे है। यदि आप चाहते हैं कि आपका संघ संगठन जीवित रहे तो जीवंत होकर हम समस्त शिक्षकों के प्रखर विरोध में सम्मिलित होईये। अन्यथा कि स्थिति में हम समस्त शिक्षक समस्त शिक्षक संगठनों की सदस्यता का परित्याग करना प्रारम्भ करेंगे।

_हम शिक्षकों के प्रत्येक न का अर्थ न ही है। नो ऑनलाइन अटेंडेंस मतलब नो ऑनलाइन अटेंडेंस।_

*सदा,सदैव,सर्वदा-नो अटेंडेंस..!!*

*आपका अपना -एक शिक्षक*

      *ऑनलाइन अटेंडेंस का प्रखर विरोधी*

_(पोस्ट में बिना कांट-छाँट के एक दूसरे शिक्षक तक शेयर करें।)_

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