राष्ट्रपति की मुहर लगते ही नया कानून लागू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को 125 दिन की रोजगार गारंटी वाले विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही यह विधेयक अब वीबी-जी राम जी कानून बन गया है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बयान में कहा, यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा और भारत की ग्रामीण रोजगार व विकास व्यवस्था में एक निर्णायक सुधार है। सरकार के अनुसार, नया कानून ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करता है। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन की मजदूरी वाला रोजगार देने का प्रावधान है। इसकी अधिसूचना भी राजपत्र में जारी कर दी गई है।
कानून में खेती के बुआई और कटाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिन का नो-वर्क पीरियड अधिसूचित करने का अधिकार भी दिया गया है, ताकि कृषि श्रम की उपलब्धता प्रभावित न हो।
मंत्रालय ने कहा, यह कानून ग्रामीण रोजगार को केवल एक कल्याणकारी योजना न रखकर, उसे विकास का एक समग्र साधन बनाने की दिशा में कदम है। इसमें रोजगार को जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़े ढांचे और चरम मौसम से निपटने वाले कार्यों से जोड़ा गया है। कानून के तहत मजदूरी का भुगतान हर सप्ताह या अधिकतम 15 दिन के भीतर अनिवार्य होगा। देरी पर मुआवजा भी देना होगा। सभी कार्य विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के तहत होंगे और इन्हें पीएम गति शक्ति जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
‘शांति’ विधेयक पर भी मुहर: राष्ट्रपति मुर्मु ने ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (शांति) विधेयक को भी मंजूरी दे दी। अब यह कानून बन गया।
● योजना में जो काम होगा, उनका डिजिटल रिकॉर्ड एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा।
● योजना का निर्माण विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के जरिए होगा
● प्रशासनिक खर्च सीमा 6% से बढ़ाकर 9%
● बेहतर स्टाफिंग, प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता
● केंद्र-राज्य साझेदारी मॉडल (60:40)
● ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 से जोड़ा गया
सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को मनरेगा से आगे ले जाते हुए ‘वीबी-जी राम जी’ कानून लागू किया है। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि आय सुरक्षा, टिकाऊ अवसंरचना और जलवायु अनुकूल विकास को एक साथ जोड़ना है। यह कानून ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप नया स्वरूप देता है।
मजबूत निगरानी और जवाबदेही
चार प्राथमिक क्षेत्रों से जोड़ा
1. जल सुरक्षा
2. ग्रामीण अवसंरचना
3. आजीविका से जुड़ा ढांचा
4. जलवायु अनुकूल कार्य
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