कुत्ते के काटने पर बच्चों को तुरंत ले जाया जाएगा अस्पताल, स्कूलों में नोडल शिक्षक तैनात – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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प्रयागराज।

जनपद में बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने अहम निर्णय लिया है। यदि किसी विद्यालय परिसर या उसके आसपास कुत्ता काटने की घटना होती है, तो पीड़ित बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाकर उपचार कराया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक अथवा नामित नोडल शिक्षक की होगी।

जारी निर्देशों के अनुसार, कुत्तों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विद्यालय स्तर पर बच्चों की निगरानी के लिए नोडल शिक्षक नामित किए जाएंगे, जो विद्यालय परिसर में कुत्तों की मौजूदगी पर नजर रखेंगे और किसी भी घटना की स्थिति में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

शहर में बनेंगे शेल्टर होम, आवारा कुत्तों को मिलेगा आश्रय

नगर निगम द्वारा शहर की गलियों और सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखा जाएगा। प्रत्येक जोन में शेल्टर होम का निर्माण किया जाएगा। एक शेल्टर होम का निर्माण लगभग एक से डेढ़ एकड़ भूमि में किया जाएगा। शेल्टर होम में कुत्तों के रहने, भोजन और देखभाल की समुचित व्यवस्था होगी।

नगर निगम के अनुसार शहर में 151 से अधिक सार्वजनिक स्थल हैं और करीब पांच हजार आवारा कुत्ते चिन्हित किए गए हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाएगा।

स्कूल परिसरों में साफ-सफाई और निगरानी के निर्देश

विद्यालय परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने और कुत्तों को आकर्षित करने वाले कचरे को हटाने की जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होगी। नोडल शिक्षक को साफ-सफाई व्यवस्था की निगरानी सौंपी जाएगी। साथ ही विद्यालय का विवरण नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।

बीएसए को भेजी जाएंगी सभी बीईओ की रिपोर्ट

निर्देश दिए गए हैं कि सभी बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) अपने-अपने विकासखंडों में स्थित परिषदीय, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों को चिन्हित करें। जिन विद्यालयों में कुत्तों के कारण बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, वहां विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। इसकी सूचना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी।

स्वास्थ्य विभाग से होगा समन्वय

नोडल शिक्षक को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल से समन्वय स्थापित कर रखा जाएगा, ताकि कुत्ता काटने की स्थिति में बच्चे को तुरंत एंटी-रेबीज इंजेक्शन और आवश्यक उपचार मिल सके।

प्रशासन का कहना है कि इन उपायों से विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और कुत्तों के काटने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

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