जस्टिस दीपांकर दत्ता के एक आदेश से 69000 शिक्षक भर्ती आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों को जगी न्याय की आस
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मसीह की बेंच ने 19 दिसम्बर को राजस्थान के एक मामले में आदेश सुनाया है कि जोकि आरक्षण ,ओवरलैपिंग, माइग्रेशन, रिलेक्सेशन से सम्बंधित है
ये मामला राजस्थान हाई कोर्ट बनाम रजत यादव जिसमे एडवांटेज/रिलेक्सेशन/ओवरलैपिंग आदि का इसु था
इस आदेश में जितेन्द्र सिंह ,सौरभ यादव, इंदिरा साहनी और दीपा ईवी एवम कई अन्य केस का जिक्र है
आदेश 45 पेज का है कल रात ही अपलोड हुआ है
अभी पूरा पढा नही है लेकिन फौरी तौर पर पढ़ने से ज्ञात हुआ है कि ये हमारे फेवर में है
कोर्ट ने डीबी के आदेश को अपहेल्ड किया है
और राजस्थान हाई कोर्ट की अपील डिसमिस कर दी
और साथ ही डीबी के आदेश की सराहना करते हुए पैरा 75 में लिखा है
हम हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सक्रिय रुख की सराहना करते हैं, जिसने ऐसी स्थिति को ठीक किया जहाँ हाई कोर्ट खुद संवैधानिक आदर्शों का उल्लंघन करता पाया गया था।
और पैरा 77 में कहा है कि जहाँ तक संभव हो, मौजूदा कर्मचारियों को हटाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
इतना समझ लीजिए कि ये बहुत ही अच्छा और सपोर्टिव आदेश है और सबसे अच्छी बात कि ये वही बेंच का है जो बेंच 69000 आरक्षण मामले की सुनवाई कर रही है
बाकी बातें विस्तार से पूरा ऑर्डर पढ़ने के बाद
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