प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक ही विषय से संबंधित दोहरी याचिकाएं पोषणीय नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है, तो उसी मामले से जुड़े वेतन रिकवरी आदेश को अलग से नई याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती। कृष्णकांत की याचिका खारिज़ करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह आदेश दिया। मिर्जापुर निवासी कृष्णकांत की नियुक्ति 31 मार्च 1998 को हुई थी। विभाग ने 4 जुलाई 2025 को उनकी नियुक्ति को प्रारंभ से ही शून्य घोषित करते हुए सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसके बाद 19 अगस्त 2025 को उनसे 71,10,614 रुपये की वेतन रिकवरी का आदेश जारी किया गया। कृष्णकांत ने सेवा समाप्ति आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे 17 अक्तूबर 2025 को खारिज कर दिया गया। हालांकि, उस आदेश के विरुद्ध उनकी स्पेशल अपील वर्तमान में लंबित है। इस बीच याची ने वेतन रिकवरी आदेश को चुनौती देते हुए एक अलग याचिका दाखिल की।
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