@ वर्तमान परिस्थितियों में न्यायिक हस्तक्षेप द्वारा राहत प्राप्त करने हेतु उपलब्ध वैध कानूनी आधारों (Legal Grounds) के संबंध में, प्रचलित तथ्यों तथा पूर्ववर्ती न्यायिक आदेशों के आलोक में निम्नलिखित चार परिस्थितियाँ स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती हैं—
1️⃣ जूनियर शिक्षकों का समायोजन
कतिपय जनपदों में जूनियर शिक्षकों का समायोजन किया गया है, जबकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में ही जूनियर शिक्षकों के समायोजन को विधि-विरुद्ध (Illegal) घोषित करते हुए निरस्त किया जा चुका है। अतः समायोजन 3.0 के अंतर्गत समायोजित ऐसे जूनियर शिक्षक न्यायालय से स्थगन/निरस्तीकरण की राहत प्राप्त करने के पूर्णतः पात्र हैं।
2️⃣ सीनियर शिक्षकों का समायोजन
कतिपय जनपदों में सीनियर शिक्षकों का समायोजन किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा नियमावली, 1981 के प्रावधानों के अनुसार शिक्षक की स्पष्ट एवं लिखित सहमति के बिना उसका स्थानांतरण/समायोजन किया जाना वैधानिक रूप से अनुमन्य नहीं है। इस आधार पर सीनियर शिक्षक न्यायालय के समक्ष राहत हेतु याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं; तथापि, इस विषय में अंतिम निर्णय माननीय न्यायालय के न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा।
3️⃣ AT UPS से HT PS पदोन्नत शिक्षकों का समायोजन
ऐसे शिक्षक जिनका पद AT UPS से HT PS में पदोन्नत किया गया है तथा जिनका समायोजन इसी प्रक्रिया में किया गया है—यदि संबंधित विद्यालय के UPS में उनके विषय का कोई अन्य शिक्षक शेष नहीं है, तो ऐसा समायोजन सेवा-हित एवं शैक्षणिक आवश्यकता के प्रतिकूल माना जाएगा। ऐसे प्रकरणों में न्यायालय से राहत प्राप्त होने की प्रबल संभावना है। साथ ही, इस श्रेणी में अन्य सहायक विधिक आधार भी उपलब्ध हैं।
4️⃣ HT PRIMARY के समायोजन की स्थिति
HT PRIMARY के समायोजन के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ द्वारा पूर्व से ही स्थगन आदेश (Stay Order) प्रभावी है। अतः HT PRIMARY के अंतर्गत किए गए समायोजन न्यायालय के आदेशाधीन हैं तथा संबंधित शिक्षकों को इस आधार पर निश्चित रूप से राहत प्राप्त होगी।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA





