
जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया। दरअसल, दिसंबर 2021 में एक व्यक्ति (ससुर) की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद मार्च 2023 में उनके एक बेटे की मौत हो गई। इसके बाद महिला ने हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम के तहत ससुर की संपत्ति से मांग की। हालांकि परिवार अदालत ने विधवा बहू की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि वह अपने ससुर की मृत्यु के समय विधवा नहीं थीं। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में विधवा बहू के हक में फैसला दिया और परिवार अदालत को महिला (विधवा बहू) आश्रित के रूप में योग्य मानते हुए योग्यता के आधार पर भरण-पोषण की राशि तय करने का निर्देश दिया।
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