लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग) ने परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में जिला स्तर पर हुई गड़बड़ियों के संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी से मुलाकात की। उन्हें आश्वासन मिला कि जिला स्तर पर गठित समिति के माध्यम से आपत्तियों का समाधान किया जाएगा।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने बताया कि माध्यमिक शिक्षकों को शत-प्रतिशत प्रोन्नत वेतनमान मिलता है, जबकि परिषदीय शिक्षकों में मात्र 20 प्रतिशत को यह लाभ मिला है। महानिदेशक ने परिषदीय शिक्षकों को भी शत प्रतिशत प्रोन्नत वेतनमान दिलाने का प्रयास करने का आश्वासन दिया।
प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने कंपोजिट ग्रांट से सिम रिचार्ज के नाम पर की जा रही अनियमितताओं पर प्रकाश डाला, जिसमें 2500 से 4000 रुपये तक की कटौती की गई है, यहां तक कि उन विद्यालयों से भी कटौती हुई है जहां सिम उपलब्ध नहीं कराए गए। इस पर महानिदेशक ने समीक्षा के बाद जांच का भरोसा दिलाया।
प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालयों की
संचालन अवधि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और आरटीई मानकों के अनुसार करने, हॉफ डे लीव, प्रतिवर्ष 31 ईएल, वरिष्ठता के आधार पर अंतर जिला तबादले, जिले के अंदर तबादले के लिए स्थाई नीति, कक्षावार व विषयवार शिक्षक नियुक्ति, गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने और प्रतिकर अवकाश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया। ब्यूरो
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