प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों का मध्य सत्र में स्थानांतरण और समायोजन करने के मामले में जवाब मांगा है।
कोर्ट ने कहा कि इस दौरान अध्यापकों के विरुद्ध कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अरुण प्रताप व 37 अन्य अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिका के अनुसार याची चित्रकूट के प्राथमिक विद्यालयों में हेड मास्टर और सहायक अध्यापक हैं। उन्हें उन विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जहां या कोई अध्यापक नहीं है या फिर बंद हो चुके हैं। याचियों का कहना है कि मध्य सत्र में समायोजन का कोई औचित्य नहीं है जबकि सत्र अप्रैल में प्रारंभ होता है। यह यूपी आरटीई एक्ट 2011 के नियम 21 का उल्लंघन भी है। याचियों को शीघ्र पदन करने का निर्देश दिया गया है।
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