इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी डिग्री कॉलेजों में तदर्थ से स्थायी हुए असिस्टेंट प्रोफेसरों की सीनियरिटी के मुद्दे पर सचिव को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही तदर्थ सेवा को वरिष्ठता निर्धारित करने में शामिल करने से इनकार के आदेश को रद्द कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने डॉ. वीरपाल सिंह की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि सही से विचार कर निर्णय नहीं लिया गया और याची को फिर से हाईकोर्ट आना पड़ा तो कोर्ट संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त आदेश करेगी।
एचओ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र का कहना था कि याची की तदर्थ नियुक्ति के बाद नियमितीकरण के लिए चार बार सिफारिश भेजी गई और आखिरकार तीन फरवरी 2005 को नियुक्ति तिथि से नियमितीकरण किया गया। तदर्थ सेवाओं की पूरी अवधि को वेतन वृद्धि और पेंशन सहित सभी लाभों के लिए गिना। दावा किया कि याची प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित नियुक्ति और उसके परिणामस्वरूप मिलने वाले लाभ, यानी वरिष्ठता व प्रोन्नति के हकदार हैं। कोर्ट के निर्देश के बावजूद अधिकारियों ने विचार नहीं किया।
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