लखनऊ। परिषदीय शिक्षा अब केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा तक सीमित नहीं रही बल्कि बच्चों के आत्मसम्मान, जीवन कौशल और व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है। इसी के तहत स्कूलों में बाल उत्सव का आयोजन कर उसके माध्यम से शिक्षा को किताबों से आगे ले जाकर बच्चों के आत्मसम्मान, जीवन कौशल और व्यक्तित्व निर्माण से जोड़ा जा रहा है। इस पहल को परिषदीय शिक्षा को आत्मविश्वासी नागरिक गढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।’
इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में आत्मसम्मान और स्वाभिमान की भावना को सुदृढ़ करना है। बाल उत्सव में बच्चे अपने अनुभव, सपने और विचार साझा करेंगे, जिससे उनमें अपनी बात निर्भीकता से रखने का आत्मविश्वास विकसित होगा। साथ ही इसके तहत होने वाले टीमवर्क, समस्या समाधान और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ी गतिविधियां बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगी।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह की माने तो ‘प्रगति-स्वाभिमान और सफलता की ओर-2.0’ बाल उत्सव के माध्यम से शिक्षा को किताबों से आगे ले जाकर बच्चों के आत्मसम्मान, जीवन कौशल और व्यक्तित्व निर्माण से जोड़ा जा रहा हैं। यह पहल परिषदीय शिक्षा को आत्मविश्वासी नागरिक गढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।’ वहीं इस संबंध में महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि यह बाल उत्सव बच्चों को अपनी बात कहने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है, ताकि प्रत्येक प्रतिभा को समान मंच मिल सके। उन्होंने कहा कि केजीबीवी की छात्राओं की सक्रिय भागीदारी इस बाल उत्सव की विशेष पहचान होगी। उनकी प्रस्तुतियां यह संदेश देंगी कि बेटियां शिक्षा के बल पर आत्मनिर्भर बनकर नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। बालिका शिक्षा और समान अवसर का भाव इस आयोजन की आत्मा में समाहित रहेगा।
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