प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रभारी प्रधानाध्यापकों को प्रधानाध्यापक पद का वेतन एवं एरियर दिए जाने के मामले में बेसिक शिक्षा विभाग को गंभीरता से निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में नियमानुसार दो माह के भीतर स्पष्ट निर्णय किया जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने कुशीनगर निवासी लाल बहादुर समेत 114 शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे लंबे समय से प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैं, इसके बावजूद उन्हें प्रधानाध्यापक पद का वेतन और एरियर नहीं दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि शासनादेश 14 अगस्त 2025 के अनुसार वे वेतन व एरियर के हकदार हैं। वहीं विभाग की ओर से कहा गया कि संबंधित शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि सभी 114 याचिकाकर्ता आगामी तीन सप्ताह के भीतर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के समक्ष अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। बीएसए को निर्देश दिया गया है कि वे सभी तथ्यों व नियमों को ध्यान में रखते हुए इस विषय में कारणयुक्त एवं स्पष्ट आदेश पारित करें।
कोर्ट के इस आदेश को प्रभारी प्रधानाध्यापकों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वेतन और एरियर से जुड़े मामलों में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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