नई दिल्ली/गाजियाबाद। संसद द्वारा 1993 में पारित एनसीटीई अधिनियम के तहत नियुक्त एवं कार्यरत शिक्षकों से जुड़े मामले में Supreme Court of India के हालिया निर्णय के बाद देशभर में असंतोष बढ़ता जा रहा है। शिक्षकों के संगठनों का दावा है कि इस फैसले से लगभग 20 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।
शिक्षक संगठनों के अनुसार, निर्णय को छह माह बीतने के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया है। हाल ही में Parliament of India में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री द्वारा दिए गए जवाब से शिक्षकों में नाराज़गी और बढ़ गई है। इसी के विरोध में विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं।
गाजियाबाद में विरोध के दौरान स्थानीय शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा को विद्यालय परिसर में ही नजरबंद कर दिया गया, जिससे वे शिक्षण कार्य भी नहीं कर सके। इस पर Ghaziabad Police की कार्रवाई को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है और तत्काल रिहाई की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए PMO India, Narendra Modi, Dharmendra Pradhan और Jayant Chaudhary को सोशल मीडिया के माध्यम से टैग कर ज्ञापन सौंपने की बात कही है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे अपने रोजगार की सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
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