मोबाइल फोन को लत किस कदर घातक हो सकती है, इसे एक घटना से समझा जा सकता है। बच्चे फोन के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। मामला निगोहां के एक गांव का है, जहां स्कूल जाने से बचने और मोबाइल फोन में गेम खेलने के लिए कक्षा सात का छात्र घर के बेड में पांच घंटे तक छिपा रहा। इधर, घबराए परिवार ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने व्यापक तलाश अभियान चलाया, लेकिन जब पुलिस ने घर में तलाश की तो वह बेड के अंदर मिला।
निगोहां थाना प्रभारी अनुज तिवारी ने बताया कि गांव से एक बच्चे के लापता होने की सूचना मिली थी। छानबीन की तो परिजनों ने बताया कि बच्चा शुक्रवार को स्कूल जाने के लिए तैयार हुआ, लेकिन स्कूल नहीं पहुंचा। मां ने स्कूल पहुंचकर जानकारी की तो पता चला कि वह स्कूल आया ही नहीं था। इस बीच गांव में बच्चा लापता होने की खबर फैल गई। पुलिस ने आसपास के बस अड्डों, जंगल इलाके और खेतों की तरफ अलग-अलग टीम बनाकर तलाश शुरू की, लेकिन बच्चे का कोई पता नहीं चला। इसके बाद घर में भी तलाश ली गई तो वह बेड के अंदर छिपा मिला। पुलिस ने उसे सकुशल बाहर निकाला।
परिजनों ने बताया कि वह पहले भी घंटों तक घर से चला जाता था, फिर लौट आता था। इस बार ऐसा नहीं हुआ। काफी देर जब वह नहीं मिला तो पुलिस को बुलाया गया। पुलिस ने बरामदगी के बाद परिजनों को बच्चे की विशेष निगरानी करने और उससे संवाद बढ़ाने की सलाह दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि बच्चे को मोबाइल गेम पसंद है, इस वजह से वह खुद को अकेला रखने के लिए ऐसा करता था।
बच्चों के सामने अधिक मोबाइल फोन का न करें प्रयोग:
मनोवैज्ञानिक डॉ. ज्योति श्रीवास्तव ने बताया कि यदि बच्चा मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिता रहा हो तो उसे डांटने की जगह समझाएं। अभिभावक बच्चों के साथ समय बिताएं और खुद भी उनके सामने फोन का प्रयोग कम करें। उन्हें आउटडोर और इंडोर गेम में लगाएं, इससे उनका स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल का फीचर लगाएं, इससे पता चलता है कि बच्चा क्या देखता है। बहुत अधिक मोबाइल देखने की आदत धीरे-धीरे कम होती है, इसलिए बच्चों को दूसरी एक्टिविटी में लगाएं।
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