लखनऊ, । विद्यार्थियों को अब आत्मरक्षा
विज्ञान का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। भारतीय शिक्षा बोर्ड की ओर से यह पहल की गई है। सेना के साथ मिलकर यह पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। आतंकी हमला होने की दशा में छात्र खुद व नागरिकों की रक्षा कर सकेंगे। देश में अभी तक इस बोर्ड से 800 स्कूल मान्यता ले चुके हैं। वहीं यूपी में 100 से ज्यादा विद्यालयों ने मान्यता ली है।
भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एनपी सिंह के मुताबिक आत्मरक्षा विज्ञान की पढ़ाई छोटी कक्षाओं से ही कराने से विद्यार्थियों को खुद व समाज की रक्षा करने की
सीख दी जाएगी। विंग कमांडर पुष्कल विजय द्विवेदी ने सेना के साथ मिल कर इसे तैयार किया है। देश में आतंकी हमला होने पर किस तरह खुद की और दूसरों की रक्षा करें
इसके बारे में उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। शास्त्र के साथ शस्त्र का ज्ञान तो देंगे, लेकिन भारतीय परंपरा के अनुसार ऐसे शौर्यवान युवा जो करुणा व नीति पर चलें इसके लिए
उन्हें तैयार किया जाएगा। यही नहीं बाल वाटिका से ही योग, प्रणायाम व आसान इत्यादि अनिवार्य रूप से सिखाया जाएगा। जिससे विद्यार्थी मानसिक तनाव से दूर रहें।
प्राचीन ज्ञान विज्ञान के साथ देंगे आधुनिक शिक्षा
बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एनपी सिंह कहते हैं कि बोर्ड का मकसद ही भारत प्रथम की भावना को छात्रों में जगाना है। अभी तक कक्षा 10 तक का पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। जल्द कक्षा 11 व कक्षा 12 का पाठ्यक्रम भी तैयार कर लिया जाएगा। इस काम के लिए दो हजार प्रोफेसर, चार हजार टीजीटी-पीजीटी पास शिक्षक लगाए गए हैं। यही नहीं इसमें आईआईटी व वैज्ञानिक संस्थानों से भी शिक्षक और वैज्ञानिक शामिल हैं। वह कहते हैं कि भारतीय ज्ञान परंपरा काफी समृद्ध है, मगर उपनिवेशवाद व मैकाले की साजिश का शिकार होकर इसका नुकसान हुआ है। अब पुनः ज्ञान-विज्ञान के साथ साथ छात्रों को एआई, आईटी, बॉयोटेक व न्यूक्लियर साइंस जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। सिंह कहते हैं कि उन्हें प्राचीन भारत के ज्ञान-विज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा की यात्रा कराई जाएगी।
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