अशासकीय महाविद्यालयों और अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में वर्षों से लंबित शिक्षक भर्ती परीक्षाएं भी शासन की ओर जारी नई गाइडलाइन के अनुरूप कराई जाएंगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दी है और अलग से बजट का इंतजाम किया जा रहा है।
नए दिशा-निर्देश के तहत प्रश्नपत्र अब दो प्रिंटिंग प्रेस में छपवाने होंगे। परीक्षा केंद्रों की
निगरानी सीसीटीवी कैमरों से होगी। इसके लिए अलग से कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक हाजिरी ली जाएगी और आइरिस कैप्चरिंग के जरिये उनकी पहचान की जाएगी। प्रश्नपत्रों को भी कई स्तरीय सुरक्षा वाले बॉक्सों में रखवाया जाएगा।
परीक्षार्थियों की संख्या पांच लाख से अधिक होने पर परीक्षा कई पालियों में करानी होगी। इसी तरह
कई अन्य व्यवस्थाएं भी करनी होगी और इनके लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत पड़ेगी, जिसके लिए अभी से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं और शासन को भी पत्र भेजा गया है। शिक्षा सेवा चयन आयोग को दो बड़ी परीक्षाएं करानी हैं, जो दो साल से लंबित हैं। इनमें अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1,017 पदों और अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में टीजीटी- पीजीटी के 4,163 पदों पर भर्ती शामिल है। सूत्रों का कहना है कि गैर वेतन मद में आयोग को बजट आवंटित किया है।
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