सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में लगे बीएलओ और दूसरे अधिकारियों को ‘धमकाए जाने’ पर कड़ा रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने भारत के निर्वाचन आयोग से कहा कि वह ऐसे मामलों को अदालत के संज्ञान में लाए, नहीं तो इससे अराजकता फैलेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि एसआईआर बिना किसी गड़बड़ी के जमीन पर हो। पीठ ने उस याचिका पर यह टिप्पणी की, जिसमें पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर के बाद मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन होने तक राज्य सरकार के पुलिस अधिकारियों को ईसीआई में प्रतिनियुक्ति देने की मांग की गई।
असम में भी एसआईआर की मांग पर आयोग को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को असम में भी बिहार और अन्य राज्यों जैसा एसआईआर कराने की मांग वाली याचिका पर निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अर्जी में राज्यों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाया है।
पहले नागरिकता लें, फिर वोटर सूची में दर्ज करें
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल करने का आदेश देने से इनकार कर दिया, जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 के भारत की नागरिकता पाने के लिए आवेदन किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब तक सक्षम प्राधिकार नागरिकता के बारे में कोई फैसला नहीं कर लेता, तब तक उनको मतदाता सूची में कैसे शामिल किया जा सकता है? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मौखिक तौर पर कहा कि पहले नागरिकता प्राप्त करें, फिर मतदाता सूची में नाम शामिल होगा। पीठ ने गैर सरकारी संगठन ‘आत्मदीप’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में बांग्लादेश से आने वालों के लिए एसआईआर में निर्देश देने की मांग की गई है।
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