इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि सिर्फ़ स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) या स्कूल के एडमिशन रजिस्टर में एंट्री, किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के तहत जन्म प्रमाण पत्र की जरूरत को पूरा नहीं करता है। यह निर्णय न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय एवं न्यायमूर्ति ज़फीर अहमद की खंडपीठ ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि बाल कल्याण समिति बिना अधिकार क्षेत्र के काम करती है और सिर्फ़ बिना सत्यापित किए गए स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति को संरक्षण गृह में रखने का आदेश देती है तो ऐसी याचिका सुनवाई योग्य है।
याचिका दाखिल करने वाले युगल ने आरोप लगाया कि उन्होंने 2023 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की थी। लेकिन लड़की की मां ने अपहरण का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है और मां ने दावा किया कि उसकी बेटी का जन्म 11 मई 2008 को हुआ एवं वह नाबालिग है। लड़की ने कहा कि वह 19 साल की है।
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