चुनाव आयोग द्वारा देशभर में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश कर दी।
SIR प्रक्रिया के दौरान नियुक्त एक बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) ने नियमों का पालन करते हुए अपनी पत्नी को भी कोई विशेष छूट नहीं दी। मतदाता सूची से जुड़ी गड़बड़ी पाए जाने पर बीएलओ पति ने नियमानुसार अपनी पत्नी को नोटिस थमा दिया। यह घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।
बताया जा रहा है कि बीएलओ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सत्यापन में रिश्ते या व्यक्तिगत संबंध आड़े नहीं आ सकते। नियम सभी के लिए समान हैं और उनका पालन करना हर जिम्मेदार कर्मचारी का कर्तव्य है।
इस मामले को लोग एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जहां कर्तव्य, ईमानदारी और निष्पक्षता को निजी संबंधों से ऊपर रखा गया। यह घटना यह संदेश देती है कि जो व्यक्ति अपने काम के प्रति ईमानदार होता है, वही समाज में सच्चा सम्मान प्राप्त करता है।
चुनाव आयोग की ओर से भी लगातार यह निर्देश दिए जा रहे हैं कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही या पक्षपात स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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