प्रयागराज, । 24 जनवरी से प्रस्तावित यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट प्रायोगिक परीक्षाओं में फर्जी परीक्षकों पर रोक लगाने के लिए अधिकृत परीक्षकों को आईकार्ड जारी करने पर विचार हो रहा है। सचिव भगवती सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को बोर्ड मुख्यालय में प्रयोगात्मक परीक्षाओं को लेकर बैठक हुई। बैठक में बोर्ड के अधिकारी और स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने शुचितापूर्ण तरीके से परीक्षाएं कराने पर मंथन किया।
पिछले कुछ वर्षों में कुछ केंद्रों पर प्रायोगिक परीक्षा कराने के लिए फर्जी परीक्षकों के पहुंचने की शिकायत मिल रही है। ऐसी आशंका को समाप्त करने के लिए बोर्ड अधिकृत परीक्षकों को आईकार्ड जारी करने पर मंथन कर रहा है। इन परीक्षकों की फोटो और बायोडाटा स्कूलों को पहले से भेज दिया जाएगा ताकि उनके पहुंचने पर स्कूल के प्रधानाचार्य संतुष्ट होने पर ही उन्हें परीक्षा लेने की अनुमति देंगे।
इसके अलावा कुछ स्कूलों से परीक्षकों को धमकी मिलने की शिकायत पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 के तहत कार्रवाई करने पर चर्चा हुई। एक दिन में एक परीक्षकों के अधिकतम 70-80 परीक्षार्थियों की ही प्रायोगिक परीक्षा लेने पर विचार हो रहा है। मोबाइल एप पर एक दिन में परीक्षक अधिकतम 70-80 परीक्षार्थियों के अंक ही अपलोड कर सकेंगे और उसके बाद एप लॉक हो जाएगा।
परीक्षक तारीख बदलने पर ही अन्य बच्चों के अंक अपलोड कर सकेंगे। बैठक में राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य धर्मेन्द्र कुमार सिंह, शिवचरणदास कन्हैयालाल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लालचन्द्र पाठक और ज्वाला देवी इंटर कॉलेज सिविल लाइंस के विक्रम सिंह आदि मौजूद रहे।
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