लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने टीईटी अनिवार्यता, वेतन विसंगति और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने जैसे मुद्दों को लेकर नाराजगी जताई है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता के कारण प्रदेश के दो लाख शिक्षक मानसिक रूप से आहत और निराश हैं। प्रभावित शिक्षकों को तत्काल छूट दिए जाने की मांग की।
रविवार को हजरतगंज स्थित डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन में हुई शिक्षकों की बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने कहा कि वेतन विसंगतियों को लेकर कई बार ज्ञापन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया गया। उन्होंने संगठन के नाम का दुरुपयोग कर शिक्षकों का शोषण करने वाले तथाकथित लोगों पर कड़ी कार्रवाई और मुकदमा दर्ज कराने की बात कही।
गैर-शैक्षणिक कार्यों पर चिंता जताते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी में लगाने से शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रभावित हो रहा है। देश का विकास शिक्षा से जुड़ा है, इसलिए बच्चों की पढ़ाई सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में प्रोन्नत वेतनमान पर 20 प्रतिशत बाध्यता समाप्त करने, सरप्लस समायोजन के खिलाफ शासन स्तर पर बात रखने और पीड़ित शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग की गई। शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के परिवारों के लिए फ्री चिकित्सा और स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु शीघ्र राजाज्ञा जारी करने की भी मांग उठी।
संगठन ने प्रदेश और जिलों में शैक्षिक सम्मेलन कराने, साल में दो बार ऑफलाइन और हर महीने ऑनलाइन बैठक करने व महिला प्रकोष्ठ गठन पर भी चर्चा की।
बैठक में संयुक्त मंत्री आलोक मिश्र, कोषाध्यक्ष ठाकुरदास यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष अनुज त्यागी, संगठन मंत्री बृजेश दीक्षित, अजय सिंह, नीलिमा देशवाल, नरेश कौशिक, मनोज सिंह, हरि शंकर राठौर सहित सभी जिलों के अध्यक्ष और मंत्री मौजूद रहे।
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