प्रयागराज। एआई जैसी एडवांस तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ अब प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) दफ्तर ने अपने ऑडिट का तरीका भी बदल दिया है। अब ऑडिट में एआई का उपयोग तो होगा ही, पहली बार ऑडिट में स्वतंत्र एजेंसी को लगाया गया है। एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह भी हुआ है कि अब जिस भी योजना की ऑडिट की जाएगी, उसका शत प्रतिशत भौतिक सत्यापन होगा। बदली व्यवस्था के तहत पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रदेश के आठ जिलों में ऑडिट शुरू की गई है। शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन से बेहतर निष्कर्ष आने की संभावना जताई जा रही है।
नई व्यवस्था में पीएजी दफ्तर की टीम में शामिल कर्मी सरकारी डेटा लेकर उनका शत प्रतिशत भौतिक सत्यापन करने के लिए गांवों का दौरा करेंगे। लाभार्थी से मिलकर रिपोर्ट लेंगे। लाभार्थियों के सर्वेक्षण की जिम्मेदारी भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी गई है। एजेंसी लेखा परीक्षण दलों के साथ समन्वय स्थापित कर काम कर रही है। ऑडिट की प्रक्रिया में हुए बदलाव के संबंध में पिछले दिनों प्रयागराज स्थित पीएजी दफ्तर के सरस्वती सभागार में कार्यशाला भी आयोजित की गई थी। कार्यशाला का उद्देश्य एआई, एमएल और ओसीआर जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर ऑडिट में रणनीतिक बदलावों के बारे में जानकारी देना था। पीएजी दफ्तर के मीडिया प्रभारी राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि अब सरकारी विभागों के सभी कामकाज का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध है। आधुनिक तकनीक से डेटा के सत्यापन का प्रयोग प्रदेश के आठ जिलों में सफल होने के बाद यह व्यवस्था पूरे देश में लागू की जाएगी। अभी तक ऑडिट के दौरान पांच से 20 फीसदी तक भौतिक सत्यापन होता रहा है।
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