प्रयागराज : 28 मार्च 2005 के पूर्व के विज्ञापन पर एक अप्रैल 2005 या इसके बाद नियुक्ति पाए शिक्षकों/कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) से आच्छादित किए जाने के राज्य सरकार के निर्णय के बाद बड़ी संख्या में शिक्षा मित्रों ने भी ओपीएस की मांग की है। यह मांग उन शिक्षा मित्रों ने की है, जो 28 मार्च 2005 से पूर्व शिक्षा मित्र के पद पर कार्यरत थे और अब सहायक अध्यापक प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपने शिक्षा मित्र के सेवाकाल को जोड़कर ओपीएस का लाभ दिए जाने की मांग की है।
बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षा मित्रों के नियुक्ति की प्रक्रिया 2001 से लेकर 2007 तक चली। 2009 में हाई कोर्ट के आदेश से शिक्षा मित्रों की नियुक्ति बंद कर दी गई। इस बीच नियुक्ति पा चुके शिक्षा मित्र सरकार के समय-समय के निर्णय के क्रम में प्रशिक्षण पाकर भर्ती प्रक्रिया से सहायक अध्यापक बन गए। इसके विरुद्ध बीएड प्रशिक्षितों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 25 जुलाई 2017 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उन्हें हटा दिया गया। इससे 1,37,000 शिक्षा मित्र प्रभावित हुए।
इनके लिए बाद में शिक्षक भर्ती आई, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बन गए। इसमें ऐसे भी शिक्षा मित्र हैं, जो 2001 से 28 मार्च 2005 के बीच नियुक्त हुए थे। अब सहायक अध्यापक बन चुके इन शिक्षा मित्रों ने 28 मार्च 2005 से पूर्व की अपनी सेवा को जोड़कर ओपीएस से आच्छादित किए जाने की मांग की है।
ओपीएस न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि उनके साथ कई लोग 28 मार्च 2005 के पूर्व शिक्षा मित्र नियुक्त हुए। सरकार के निर्णय के क्रम में बीटीसी किया, सहायक अध्यापक बने, फिर हटाए गए। सरकार के आदेश से भर्ती में शामिल होकर पुनः शिक्षक बने। इस तरह सरकार ने जैसा-जैसा कहा, वैसा- वैसा करते रहे। इसमें शिक्षा मित्रों की कोई गलती नहीं है।
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