यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नए नियम लागू किए है। इनका औपचारिक नाम इक्यूटी / एंटी डिस्क्रिमिनेशन रेगुलेशन बताया जा रहा है। नए नियमों के प्रमुख प्रावधान में हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इडिटी कमेटी (Equity Committee) का गठन अनिवार्य। एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक छात्रों की शिकायतों के लिए विशेष शिकायत निवारण तंत्र। जातिगत भेदभाव की शिकायत पर त्वरित जांच और कार्रवाई का प्रावधान। संस्थानों को हर साल यूजीसी को अनुपालन रिपोर्ट देना अनिवार्य। नियमों का उल्बंधन होने पर संस्थान की मान्यता या फडिंग पर असर पड़ सकता है। यूजीसी का कहना है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 15 और 46 की भावना के अनुरूप है और कमजोर वर्गों को सुरक्षा देने के लिए जरूरी है।
विरोध के मुख्य कारण
विरोध करने वालों का कहना है कि नियम कैवल कुछ वनों को केंद्र में रखते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के लिए कोई स्पष्ट सुरखा प्रावधान नहीं है। नियमों में फर्जी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत की स्थिति में क्या कार्रवाई होगी, यह स्पष्ट नहीं है। इससे संस्थानों में डर और असंतुलन पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। संविधान के समानता के सिद्धांत पर सवाल पर आलोचको का तर्क है कि यह नियम समानता की जगह वर्ग आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देते हैं, जो अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के खिलाफ हो सकता है।
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