लखनऊ। दो कमरों का भवन और उसमें तीन विद्यालयों के बच्चे। रजिस्टर पर करीब सौ दाखिले, पर मौके पर बच्चों की संख्या 40 से भी कम। बात हो रही है नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चिकमंडी की। वजीरगंज प्रथम और द्वितीय विद्यालय के भवन जर्जर होने की वजह से यहीं पर शिफ्ट किए गए हैं।
इसके बाद तीनों विद्यालय इसी चिकमंडी के दो कमरों वाले भवन में संचालित हो रहे हैं। राजधानी में नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी तो है ही, साथ ही संसाधनों का भी टोटा है। आम अभिभावक मजबूरी में ही यहां अपने बच्चों को भेजते हैं। वजीरगंज प्रथम और
द्वितीय विद्यालय के भवन जर्जर होने की
वजह से इन्हें कुछ दूर स्थित चिकमंडी विद्यालय में शिफ्ट किया गया है। चिकमंडी विद्यालय का भी एक हिस्सा जर्जर है। इसलिए इस समय यहां पर महज दो कमरे हैं। तीनों विद्यालयों में इस समय तीन शिक्षक हैं। ये तीनों शिक्षक बच्चों को इन्हीं दो कमरों में बिठाते हैं। विद्यालय में
पर्याप्त स्थान न होने की वजह से न तो अभिभावक बच्चों को भेजना चाहते हैं और न ही शिक्षक उनको बुलाने के इच्छुक हैं।
समायोजन के इंतजार में विद्यालय
नगर क्षेत्र के विद्यालयों में करीब 20 साल से शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई है। अन्य जनपद से आने वाले शिक्षक भी ग्रामीण क्षेत्र में तैनात किए जाते हैं। नगर क्षेत्र के विद्यालयों में तैनात शिक्षक धीरे-धीरे कर सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं। इसकी वजह से इन विद्यालयों में अब शिक्षकों की कमी होने लगी है। बेसिक शिक्षा मंत्री से लेकर शिक्षा अधिकारी शिक्षकों के समायोजन की बात कह रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हुई है। ऐसे में विद्यालयों में बच्चों की संख्या भी कम होती जा रही है।
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