जासं, मुजफ्फरपुर : सरकारी स्कूलों के निरीक्षण की गति धीमी हो गई है। निरीक्षी पदाधिकारी लक्ष्य के अनुरूप स्कूलों का निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। निरीक्षण की इस गति पर वीडियो कांफ्रेसिंग में नाराजगी जतायी गई थी। अपर मुख्य सचिव ने निरीक्षण के प्रक्रिया में बदलाव किए। उप विकास आयुक्त के स्तर से निरीक्षण का शेड्यूल जारी किया गया है।
जो तीन महीने का है। निरीक्षण पदाधिकारी स्कूलों के निरीक्षण में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इस वजह से स्कूलों की व्यवस्था एक बार फिर पूर्व की स्थिति में लौटना शुरू हो गई है। तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने स्कूलों की व्यवस्था को पटरी में लाने का काफी प्रयास किया। इसका असर दिखने लगाथा। निरीक्षी पदाधिकारी प्रतिदिन स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देते थे। इस दौरान अनुपस्थित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होती थी, लेकिन वर्तमान में सबकुछ पूरी तरह से बदल गया है। पोर्टल पर अपलोड होने वाले स्कूलों की निरीक्षण रिपोर्ट की हर दिन समीक्षा होती थी। सिस्टम के सुस्त होने से निरीक्षण पदाधिकारी भी सुस्त हो गए। दूसरी ओर शिक्षकों में भी निरीक्षण का खौफ समाप्त हो चुका है। पिछले दिनों निरीक्षण की गति पर काफी नाराजगी जाहिर किया गया था।
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