उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष अब केवल आईएएस अफसर ही नहीं बनेंगे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2025 को मंजूरी दे दी है। अब प्रमुख सचिव या उसके समकक्ष पद पर सेवारत या रिटायर अधिकारी भी अध्यक्ष बन सकते हैं।
इसके अलावा किसी विश्वविद्यालय के सेवारत या रिटायर कुलपति या किसी विश्वविद्यालय के दस वर्ष तक प्रोफेसर और तीन साल के प्रशासनिक अनुभव संबंधी अर्हता में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इस संशोधन से पहले प्रावधान था कि भारतीय प्रशासनिक सेवा का राज्य सरकार के प्रमुख सचिव या समकक्ष पद पर सेवारत या रिटायर अफसर अध्यक्ष बन सकते थे। भारतीय प्रशासनिक सेवा शब्द हटने से इसके समकक्ष पुलिस और दूसरी सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों के भी अध्यक्ष पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
इससे पहले पूर्व अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने 22 सितंबर को इस्तीफा दे दिया था जिसे शासन ने 26 सितंबर को स्वीकार करते हुए नए अध्यक्ष के लिए विज्ञापन जारी किया था।
अध्यक्ष के लिए 21 अक्तूबर तक आवेदन मांगे गए थे लेकिन माना जा रहा है कि विधिक अड़चन के कारण ही अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी। उसके बाद 19 नवंबर को अध्यक्ष पद के लिए नए सिरे से दस दिसंबर तक आवेदन मांगे गए थे।
शासन के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने शिक्षा सेवा आयोग के सचिव मनोज कुमार को अध्यादेश में 18 नवंबर को हुए संशोधन का गजट 28 नवंबर को भेज दिया है।
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