शिक्षक प्रदर्शन के इतिहास में मंगलवार को नई दिल्ली में एक और बड़ी महारैली देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी में जंतर मंतर पर देशभर से आए लाखों शिक्षकों कर्मचारियों ने लगातार दूसरे दिन पुरानी पेंशन, निजीकरण व टीईटी अनिवार्यता की समाप्ति को लेकर आवाज बुलंद की। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) व सहयोगी संगठनों के बैनर तले आयोजित इस धरना प्रदर्शन में शिक्षक व शैक्षिक कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें न तो एनपीएस और न ही यूपीएस चाहिए उन्हें सिर्फ और सिर्फ पुरानी पेंशन ही चाहिए। इस अवसर पर नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने देशभर से आए शिक्षक कर्मचारी को संबोधित करते हुए कहा कि आज यहां लाखों शिक्षक कर्मचारियों को देखकर सरकार डर गई है।
पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र में मोबाइल जैमर लगा दिया गया है ताकि शिक्षक कर्मचारियों की आवाजों को दबाया जा सके। कहा कि, अब सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी और पुरानी पेंशन हर स्थिति में लागू ही करनी पड़ेगी। उन्होंने टीईटी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि सरकार 20 साल पहले नौकरी पाए शिक्षकों को निकाल सकती है। तो हिम्मत है तो यूपीएससी से चयनित अधिकारियों को निकाल कर दिखाए। उन्होंने देश भर के शिक्षक कर्मचारियों को सोशल मीडिया के बेहतर इस्तेमाल करने का आह्वान किया साथ ही ‘कलम चलाओ आंदोलन बढ़ाओ’का नारा दिया। इस दौरान उन्होंने फिर से अर्द्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन देने की मांग उठाई और कहा कि नेता साढ़े तीन लाख रुपये पेंशन पा रहा है वह भी हमारे टैक्स से और हमारे कर्मचारी 1250 रुपये की पेंशन पाएं यह कौन सा लोकतंत्र है। उन्होंने कुछ कर्मचारी नेताओं की सरकार से चापलूसी को भी निशाना बनाते हुए कहा कि ऐसे लोगों से स्वयं बचें, देश को बचाएं और अपने अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने अपने संगठन, आंदोलन, शिक्षक कर्मचारी की एकता पर गर्व करते हुए कहा कि जिस दौर में देश में तानाशाही चरम पर है, उस समय कुछ लोग तो हैं जो आवाज उठा रहे हैं। वहीं संगठन की राष्ट्रीय महासचिव प्रज्ञा ने कहा कि सरकार एनपीएस से यूपीएस पर आई और जल्द ही यूपीएस से ओपीएस पर आना पड़ेगा। देश के 97% कर्मचारियों ने यूपीएस को नकार दिया है। पीबीएसएस हरियाणा के विजेंदर धारीवाल, राष्ट्रीय संयोजक रेलवे अमरीक सिंह, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी प्रदीप ठाकुर आदि सभी ने भी एक स्वर में पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी।
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