थोड़ा ध्यान इधर भी अपेक्षित जिससे सरकारी विद्यालय की घटती हुई संख्या में कुछ सुधार हो सके l

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 थोड़ा ध्यान इधर भी अपेक्षित जिससे सरकारी विद्यालय की घटती हुई संख्या में कुछ सुधार हो सके l

रायबरेली। प्राइमरी या जूनियर की मान्यता ले ली और हाईस्कूल या इंटरमीडिएट तक कक्षाएं चला रहे हैं। यही नहीं विद्यालय की मान्यता तक नहीं है, फिर भी स्कूल चल रहा है। इस तरह के विद्यालयों की संख्या जिलेभर में लगभग 250 होगी।

बिना मान्यता या फिर मान्यता से अधिक (अमान्य) कक्षाएं चलाने वाले इन स्कूलों की संख्या हर विकास क्षेत्र में औसतन 10 से 15 होगी। हर साल विकास क्षेत्र स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निरीक्षण में ऐसे स्कूलों को नोटिस थमाया जाता है।

स्कूल या कक्षाएं बंद करने को कहा जाता है, लेकिन कुछ दिन बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। अफसरों की लापरवाही और विद्यालय संचालकों की मनमानी कम नहीं हो रही है। इससे मनमानी फीस देने वाले अभिभावकों की नेब खाली हो रही है। बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

थोड़ा ध्यान इधर भी अपेक्षित जिससे सरकारी विद्यालय की घटती हुई संख्या में कुछ सुधार हो सके l

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