हाई कोर्ट ने कहा कि संबंधित प्राधिकारी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडीआइएसई अथवा यू-डायस) पोर्टल पर सही व प्रमाणित डेटा सत्यापित कर इसके अनुरूप ही सहायक अध्यापकों-प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति करें ताकि निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखा जा सके। कोर्ट ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी को याचियों के प्रत्यावेदन पर एक माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है और तब तक इन अध्यापकों की वर्तमान स्थिति कायम रखने को कहा है। न्यायमूर्ति मंजूरनी चौहान की एकलपीठ ने यह आदेश देते हुए 157 उन शिक्षकों को तात्कालिक तौर पर राहत दी है जिन्होंने राज्य सरकार के 14 नवंबर 2025 के आदेश के क्रम में अपने पुनर्व्यवस्थापन को चुनौती दी थी।
कोर्ट ने कहा, याचीगण ने आवश्यक तथ्यात्मक जानकारी नहीं दी है, जिससे कार्रवाई की वैधता की जांच करना मुश्किल हो रहा है। याचीगण को संस्थान-वार विवरण देना होगा, जिसमें स्वीकृत संख्या, कार्यरत संख्या और शिक्षकों की
जिलाधिकारी की कमेटी महीने भर में याचियों के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय ले
अधिकता या कमी की जानकारी हो। प्रशासनिक कार्रवाई में तथ्यात्मक त्रुटियों के कारण प्रणालीगत असंतुलन हो सकता है और इससे छात्रों का हित प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में निष्पक्षता और तर्कसंगतता सुनिश्चित करने के लिए सीमित जांच करनी होगी। कोर्ट ने कहा, पुनर्वितरण मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। यदि कार्रवाई मनमानी है, गैर मौजूद या असत्यापित डेटा पर आधारित है तथा इससे सार्वजनिक हित गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है तो संवैधानिक अदालतें शक्तिहीन नहीं हैं। अदालत ने पाया कि नवंबर 2025 के सरकारी आदेश के अनुसार पुनर्वितरण के लिए निर्धारित मानदंडों का पालन किया गया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
याचीगण के अधिवक्ता ने कहा कि पूर्व में आदेश था कि जिलाधिकारी हर साल जुलाई से पहले शिक्षकों की स्वीकृत संख्या की समीक्षा कर आवश्यकता अनुसार पुनर्वितरण करते थे, लेकिन नवंबर का आदेश 23 मई 2025 के आदेश से अलग है। याचीगण का कहना था कि बच्चों के निश्शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रविधानों की अनदेखी की जा रही है। अदालत ने पाया कि प्रत्येक संस्थान में कम से कम दो शिक्षकों की आवश्यकता है। छात्र संख्या के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता है। जूनियर बेसिक स्कूल में 150 तथा सीनियर बेसिक स्कूल में 100 से अधिक छात्रों के लिए एक प्रधानाध्यापक की आवश्यकता है। अरुण प्रताप सिंह व 37 अन्य, संगीता सिंह पटेल और 42 अन्य, अभिषेक कुमार त्रिपाठी व 11 अन्य, स्वदेश कुमार व 57 अन्य तथा अमन राज व पांच अन्य की याचिकाओं को एक साथ सुना गया था। कोर्ट ने निर्णय में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली रिसर्च एसोसिएट वैष्णवी केसरणी की भी प्रशंसा की है।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA





