यूपी के विधानसभा में सत्र के दौरान सपा विधायक ओम प्रकाश ने बुधवार को शिक्षामित्रों के मानदेय और उनकी गृह जिले की ग्राम पंचायत में तैनाती का मामला उठाया। उनकी बात सुनने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षामित्रों को उनके गृह जिलों की ग्राम पंचायतों में तैनाती के लिए मुक्त कर दिया जाएगा। आदेश पहले ही हो चुके हैं। एसआईआर की वजह से उन्हें फिलहाल मुक्त नहीं किया जा रहा है।
ओम प्रकाश ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक शिक्षामित्रों की भर्ती हुई थी। हालांकि अब शिक्षामित्र लाचार हैं। एक ही विद्यालय में उनके साथ पढ़ाने वाले अध्यापकों को 80 हजार से एक लाख रुपये तनख्वाह दी जा रही है, जबकि शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। शिक्षा मित्रों में से 37 हजार टीईटी पास हैं। बावजूद इसके शिक्षामित्रों को न तो 68,500 और न ही 69 हजार शिक्षक भर्ती में शामिल किया गया। तमाम शिक्षामित्र अपने निवास से दूर तैनात हैं। इससे भी उन्हें दिक्कत हो रही है। मेरे गांव में 13 शिक्षामित्र हैं। जब वह अपनी दिक्कत कहते हैं तो हम केवल मूकदर्शक बने सुनते रहते हैं। पूरे देश में शिक्षामित्र बने थे। यूपी में इनकी संख्या 1,37,500 है। सभी राज्यों में उनकी तनख्वाह बढ़ गई, जबकि यूपी में नहीं हुआ। इनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब दिया कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और शिक्षकों के कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका है। ग्राम पंचायतों में भी तैनाती का आदेश जारी हो चुका है। हालांकि, एसआईआर की प्रक्रिया में इनकी ड्यूटी लगी है। इसके बाद ही इनकी रिलीविंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 रुपये था जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया गया है। आगे भी जो बेहतर होगा वह किया जाएगा। मंत्री के जवाब पर सपा सदस्यों ने कहा कि हमने तो शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर उन्हें 40 हजार रुपये वेतन दिया था। सपा सरकार तो उनकी बेहतरी चाहती थी।
विधान परिषद में निजीकरण के मुद्दे पर सपा-भाजपा सदस्यों में नोंकझोंक
निजीकरण के मुद्दे पर विधान परिषद में बुधवार को सपा-भाजपा सदस्यों के बीच जमकर नोंकझोंक हुई। इस दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे के कार्यकाल की खामियां गिनाते रहे। बाद में सपा सदस्यों ने गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाया और नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।शून्यकाल में सपा के डा. मानसिंह, आशुतोष सिन्हा, शाहनवाज खान तथा बलराम यादव समेत नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने काम रोको प्रस्ताव के तहत इस मुद्दे को उठाया। आशुतोष सिन्हा ने कहा कि सरकार पूरी तरह से निजीकरण और आउटसोर्सिंग के काम लग गई है। सभी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। उनको न भरकर सरकार आउटसोर्सिसिंग पर भर्तियां करवा रही है। इसमें आरक्षण की व्यवस्था खत्म हो जाती है, जो कि हमें बाबा साहब ने दिया था। बीमा, पेंशन और अन्य कोई सुविधा नहीं मिलती। नाम मात्र का मानदेय दिया जाता है। वहीं डा. मान सिंह यादव ने कहा कि सरकार प्रदेश के बेरोजगारों के साथ धोखा और छलावा कर रही है। भारतीय जनता पार्टी की मंशा रोजगार देने की कतई नहीं है।
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