तकरीबन 9 महीने तक व्यवस्था से लड़कर आखिरकार 15 साल के 11वीं के छात्र शशि शेखर दुबे ने यूपी बोर्ड से अपनी हाई स्कूल की उत्तर पुस्तिकाएं ले ही लीं। राज्य सूचना आयोग के आदेश पर यूपी बोर्ड ने शशि को सभी छह विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी तब दीं जब आयोग ने दंडित करने की चेतावनी दी।
झांसी के रहने वाले शशि शेखर दुबे ने वर्ष 2025 में यूपी बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। उसे गणित में 100,हिंदी में 92, विज्ञान में 90, सामाजिक विज्ञान में 87, चित्रकला में 84 और अंग्रेजी में 73 अंक मिले थे। शशि को लगा कि गणित को छोड़कर अन्य विषयों में भी उसे और अधिक अंक मिलने चाहिए थे। उसने माध्यमिक शिक्षा परिषद के जनसूचना अधिकारी (पीआईओ) से हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान व चित्रकला विषयों की मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की प्रमाणित छाया प्रतियां मांगीं। सूचना न मिलने पर पहली अपील की लेकिन प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी यह कहकर सूचना नहीं दी कि अभी स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है। इस पर शशि शेखर दुबे ने राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत की, जिस पर सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम की पीठ ने सुनवाई शुरू की।
आयोग को भी बरगलाने की कोशिश
आयोग में पीआईओ ने बताया कि अपीलकर्ता शशि को बोर्ड कार्यालय में उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने को बुलाया गया था लेकिन वह नहीं पहुंचा। यूपी बोर्ड के अधिकारी ने आयोग को बरगलाते हुए कहा कि अब कॉपियां दिखाने का नियम अब नहीं है। इस पर शशि ने आपत्ति दर्ज करवाई। इस पर आयोग ने पीआईओ को निर्देशित किया गया कि अगर ऐसा कोई नया नियम है तो उसकी प्रति अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। दंड की बात सुनकर पीआईओ ने शशि को उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध करवा दीं और जानकारी सूचना आयोग को भी दी। इसके बाद पीठ ने जनसूचना अधिकारी के आचरण की भर्त्सना करते हुए अपील निस्तारित कर दी।
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