सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी के जरिए 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी को पूरी तरह से ‘लूट या डकैती’ बताया। कोर्ट ने कहा कि यह रकम कई छोटे राज्यों के सालाना बजट से भी अधिक है।
शीर्ष अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), बैंकों और संचार विभाग जैसे हित धारकों के साथ विचार विमर्श करने को कहा। साथ ही एक महीने के भीतर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया।
सख्त कार्रवाई की जरूरत: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह देखते हुए कि ऐसे अपराध बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के कारण हो सकते हैं, इसलिए आरबीआई और बैंकों से समय पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत पर बल दिया।
बैंक अलर्ट जारी करें : मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि बैंकों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी प्रणाली विकसित करें जिससे खाता धारकों को ‘डिजिटल गिरफ्तारी स्कैम’ में फंसने के बाद किए जा रहे बड़े ट्रांजेक्शन रोकने के लिए अलर्ट किया जा सके। अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा, आरबीआई इस पर ध्यान देगा। सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि आरबीआई ने एक एसओपी बनाई है जिसमें साइबर धोखाधड़ी को रोकने के लिए बैंकों द्वारा डेबिट कार्ड को अस्थायी रूप से रोकने के लिए कार्रवाई करने का प्रावधान है।
समिति बनाई: इस बीच, गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं रोकने और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) का गठन किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, आरबीआई ने बताया है कि म्यूल खातों का पता लगाने के लिए 23 बैंकों ने पहले ही म्यूलहंटर एआई तकनीक लागू की है।
बैंक जनता के लिए बड़ी जिम्मेदारी बनते जा रहे हैं। कोर्ट उनके रिकवरी एजेंट बन रहे हैं। वे लापरवाही से लोन देते हैं और फिर आपके पास वसूली के लिए एनसीएलटी तो है ही। -सुप्रीम कोर्ट
बैंक भी सक्रिय भूमिका निभाएं, अलर्ट भेजें
बैंक भी साइबर ठगी रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं। यदि एक पेंशनभोगी के खाते से अचानक 50 लाख, 70 लाख या एक करोड़ की रकम निकलने लगे तो बैंक अलर्ट भेजे। आरबीआई कोई तंत्र विकसित कर सकता है तो ठीक अन्यथा हम दिशा-निर्देश पारित करेंगे।
पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए फ्रेमवर्क बनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से कहा कि डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार करें। साथ ही कहा कि ऐसे मामलों में व्यावहारिक और उदार दृष्टिकोण अपनाए जाने की जरूरत है।
सीबीआई जांच के लिए मंजूरी दें गुजरात-दिल्ली
अदालत ने सीबीआई को डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया। साथ ही गुजरात और दिल्ली सरकार को डिजिटल गिरफ्तारी के पहचाने गए मामलों में जांच बढ़ाने के लिए सीबीआई जांच को मंजूरी देने को आदेश दिया।
जस्टिस बागची ने कहा, समस्या यह है कि बैंक ज्यादा बिजनेस मोड में हैं। वे जाने-अनजाने में ऐसे मंच बन रहे हैं जिनके जरिए अपराध से कमाए गए पैसे का तेजी से और बिना रुकावट लेन-देन हो रहा है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में ही कहा गया कि अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 तक साइबर धोखाधड़ी के जरिए 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है।
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