उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों की हालत आज भी बदहाल है। पिछले 25 वर्षों में कई सरकारें आईं-गईं, मगर नीतिगत अस्थिरता, आपसी गुटबाजी और ग़ैर-ईमानदार नेतृत्व ने शिक्षामित्रों को लगातार हाशिए पर रखा।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह पोस्ट, और इसमें दिखाई गई तस्वीरें, शिक्षामित्रों के जमीनी संघर्ष, बेचैनी और उपेक्षा की दर्दनाक कहानी कहते हैं।
क्या सरकारों को अपने वादे याद हैं?
बार-बार सरकार और नेताओं द्वारा बड़े-बड़े वादे किए गए, मगर परिणाम के तौर पर शिक्षामित्र आज भी न्याय और स्थायित्व का इंतजार कर रहे हैं। “क्या प्रधानमंत्री मोदी को यूपी के शिक्षामित्रों से किया गया अपना वादा याद है?” जैसे सवाल शिक्षामित्रों के मन में निरंतर पीड़ा और असुरक्षा को दर्शाते हैं।
नतीजा: आंखों में आँसू, संघर्ष जारी
शिक्षामित्रों की बदहाल मानसिक और शारीरिक स्थिति की एक झलक इस तस्वीर में भी साफ़ दिखती है. 25 साल का संघर्ष, और केवल आश्वासन—यह तस्वीरें और सुर्खियाँ न्याय और सम्मान की तलाश में जूझ रहे इन साथियों की व्यथा को उजागर करती हैं।
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