बच्चों को स्कूली शिक्षा के प्रति आकर्षित करने, उन्हें अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराने और स्वस्थ रखने के उद्देश्य से चलाई जा रही मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) अब भी पोषण के लिहाज से कारगर नहीं है। सरकार फंड पर्याप्त मुहैया करा रही, लेकिन लेकिन बच्चों की थाली से पोषण की चोरी कर ली जा रही। मेनू से विपरीत भोजन परोसा जा रहा। हफ्ते में तीन दिन हरी सब्जी, एक दिन सलाद, एक दिन सोयाबीन और एक दिन लाल चने का छोला देना है। हकीकत में सिर्फ आलू की सब्जी, पतली दाल और तो और कई बार बासी खाना ही परोस दिया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब एमडीएम के लिए फंड में कोई कमी नहीं तो फिर पोषण की चोरी कर किनकी जेबें भरी जा रहीं? बेस्वाद और बासी भोजन बच्चे फेंक देते हैं। बच्चों को यह भी याद नहीं कि उन्होंने विद्यालय में आखिरी बार हरी सब्जी, सलाद और मौसमी फल कब खाए। दैनिक भास्कर की टीम ने विभिन प्रखंडों के सरकारी स्कूलों में एमडीएम की पड़ताल की तो ऐसे मामले सामने आए।
बड़ा सवालः मध्याह्न भोजन के लिए पर्याप्त फंड मिल रहा, फिर किसकी जेब में बच्चों का निवाला ?
मध्याह्न भोजन मेन्यू
सोमवार व गुरुवारः चावल, मिश्रित दाल, हरी सब्जी
मंगलवारः जीरा र आलू की सब्जी राइस, सोयाबीन व
बुधवार व शनिवारः खिचड़ी (हरी सब्जी युक्त), चोखा, मौसमी फल शुक्रवारः पुलाव, लाल चना का छोला, हरा सलाद
विभाग से मिल रहा पूरा फंडः राणा कुमार
प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव राणा कुमार झा ने बताया कि एमडीएम के लिए विभाग से पूरा फंड मिल रहा है। फिर भी उन्हें मेनू के हिसाब से भोजन नहीं मिलता। पहली से 5वीं तक प्रति छात्र 100 ग्राम भोजन रोज देना है। इसके लिए प्रति बच्चा 5 रुपए 45 पैसे खर्च किए जाते हैं। 6ठी से 8वीं के प्रत्येक बच्चे को 150 ग्राम भोजन देना है। इसके लिए प्रति बच्चा 8 रुपए 17 पैसे खर्च किए जाते हैं।
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