हाईकोर्ट ने इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध इलाहाबाद डिग्री कॉलेज में 28 नवंबर 2022 के विज्ञापन के तहत जारी कॉमर्स के असिस्टेंट प्रोफेसर की चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय से याचिका पर एक सप्ताह में जवाब मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने हिमांशु कुमार पांडेय की याचिका पर उनके अधिवक्ता देवांशु मिश्र, इविवि के अधिवक्ता कुणाल रवि सिंह और एडीसी के अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल को सुनकर दिया है। याचिका में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की नियुक्ति के बाबत साक्षात्कार की शार्ट लिस्टिंग प्रक्रिया की वैधानिकता को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि यूजीसी के रेगुलेशन 2018 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के मानक निर्धारित हैं। इन मानकों के अनुसार मास्टर डिग्री या समकक्ष डिग्री में 55 फीसदी अंक अर्हता रखी गई है। याची का कहना है कि उसके पास बीकॉम के साथ एमबीए की डिग्री भी है जो परास्नातक के समकक्ष मान्य है। याचिका में बीएचयू में जारी विज्ञापन का हवाला देते हुए कहा गया है कि शार्टलिस्ट में कुछ अभ्यर्थियों को सामान्य व ओबीसी में भी रखा गया है, जो सही नहीं है।
विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि यदि याची की बात मान भी ली जाए तो उसे 80 प्रतिशत अंक मिलेंगे और सामान्य श्रेणी का कटऑफ 81 प्रतिशत अंक हैं। इस कारण याची को साक्षात्कार में बुलाया नहीं जा सकता। याची की ओर से कहा गया कि एक ही अभ्यर्थी को सामान्य व आरक्षित वर्ग में रखना सही नहीं है। इससे कटऑफ में फर्क आ सकता है और याची के कटऑफ की सीमा में आने की संभावना है। एक मामले में विश्वविद्यालय ने साक्षात्कार में शामिल कराया भी है लेकिन परिणाम पर रोक लगा रखी है। ऐसी स्थिति में याची को भी साक्षात्कार में शामिल होने दिया जाए। या जब तक शार्टलिस्ट की वैधता तय नहीं हो जाती, तब तक चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। अगली सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तारीख लगाई गई है
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